Meri aawaj

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Wednesday, September 10, 2014

पहचान

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जो युगों से अमिट थी पहचान ढूँढता हूँ २
देश  के  हर नर  में श्री राम  ढूँढता  हूँ
सीता  ढूँढता  हूँ  नारी के  आचरण  में २
मंदिरों  में  जाकर  भगवान  ढूँढता  हूँ २
जो युगों से अमिट थी पहचान ढूँढता हूँ

चली थी जिस पे राधा चली थी जिस पे मीरा २
चला था बन के जोगी वो संत  वो कबीरा
वो राह ढूँढता हूँ उनके निशान ढूँढता हूँ २
जो युगों से अमिट थी पहचान ढूँढता हूँ

कहाँ है मेरे गौतम कहाँ है मेरे गांधी २
सब कुछ बिखर रहा है ऐसी चली है आंधी
जो हों देश पर समर्पित अरमान ढूंढ़ता हूँ २
जो युगों से अमिट थी पहचान ढूँढता हूँ

फिर देश में बहुत से जयचंद हो गए है २
सच्चाई घुट रही है लब बंद हो गए है
शेखर भगत वो बिस्मिल वो खान ढूँढ़ता हूँ २
जो युगों से अमिट थी पहचान ढूँढता हूँ
देश  के  हर नर  में श्री राम  ढूँढता  हूँ

-अभिषेक


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2 comments:

ShimlaTimes said...

अच्छी रचना

Sushil Das said...

http://geekonjava.blogspot.in/2015/12/five-best-way-convert-arraylist-string.html