Meri aawaj

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Friday, July 9, 2010

दूरियां

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इस
रंग रूप के मौसम में सब फीका-फीका लगता है
तुम दूर-दूर जो बैठे हो जग रूठा-रूठा लगता है

जब हाँथ पकड़ तुम चलते थे सब कुछ सतरंगी हो जाता था
अब साथ नहीं जो तुम मेरे सब फीका-फीका लगता है

जब याद तुम्हारी आती है मन मेरा भारी हो जाता है
कुछ याद नहीं रहता मुझको दिल टूटा-टूटा
लगता है


जब तुम थे मेरे पास तो जैसे दुनिया मेरी मुट्ठी में 
अब पास नहीं जो तुम मेरे सब छूटा-छूटा लगता है

जो तुम आजाओ पास मेरे दिल खिल जाये सब मिल जाये
ये सोच भी लेता हूँ तो सब कुछ पहले जैसा लगता है

इस रंग रूप के मौसम में सब फीका-फीका लगता है
तुम दूर-दूर जो बैठे हो जग रूठा-रूठा लगता है



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-अभिषेक

1 comment:

upendra said...

hallo brother,,thats great.
it touched my heart to the core.
"Duriyan"is something which I also feel in you all's absence.
it was really fantabulous to read your blogs.
request you to keep finding little time for your old art,like this
wish you all the best wishes.