Meri aawaj

Meri aawaj

Saturday, September 25, 2010

मुहब्बत का मैंने वो मक़ाम पा लिया

===============================
मुहब्बत का मैंने वो मक़ाम पा लिया 
मिले उसको रोशनी, सो खुद को जला लिया

हम खाक है और वो है सितारों का हकदार
मिले उसको बुलंदी, सो खुद को मिटा लिया

जिन्दगी ने तोहफे में दिए कुछ फूल कुछ कांटे  
काँटों पे सोये हम, उसे फूलों पे बिठा लिया

करता भी क्या उस घर का जिस में नहीं है वो 
इसलिए "अनन्त" मैंने घर को जला दिया

-अभिषेक "अनन्त"
===============================

Friday, September 24, 2010

सोच

==========================
वक़्त की तरह मैं चुपचाप चल रहा हूँ
बर्फ का टीला हूँ,  बूंद बूंद गल रहा हूँ

राख है जो दिखती है बाहर से सभी को
अन्दर से अंगार हूँ, अन्दर मैं जल रहा हूँ

क़त्ल करके देख लो कर पाओ जो मुझको
मैं तो एक ख्वाब हूँ, आँखों में पल रहा हूँ

मिट्टी का नहीं हूँ जो मिट जाऊंगा में कल
मैं कल भी रहूँगा, और मैं कल भी रहा हूँ

चले जाते है इंसान सब छोड़ कर के युं
मैं तो उनकी  सोच हूँ, जिन्दा ही रहा हूँ

-अभिषेक 
========================= 

Sunday, September 19, 2010

श्री शिव सागर शर्मा जी की कवितायेँ

आज मैं आप लोगों को आज के युग के श्रंगार रस के कवि श्री शिव सागर शर्मा जी की कुछ रचनाएँ सुनाने जा रहा हूँ | मैं जब भी श्री शिव सागर जी को सुनता हूँ तो मुझे श्रंगार रस के श्रेष्ट कवि श्री बिहारी जी की स्मृति आती है जिन्हें में अपने स्कूल के दिनों में पड़ा करता था |
तो यहाँ हैं श्री शिव सागर जी की पहली रचना "ताजमहल" जो बहुत ही प्रसिद्ध हुई है :



वैसे तो कविता का एक एक शब्द मुझे पसंद है पर मेरी सबसे पसंदिता पंक्ति है "चांदनी रात में ताज के फर्श पर यूँ न टहलो ये मीनार हिल जाएगी " 

एक और इनकी रचना जो मुझे बहुत पसंद है आपको सुनवाता हूँ "नैना कज़रा बिना कटार "

 

Thursday, August 19, 2010

तूँ मेरी प्रेम ग़ज़ल है

==========================================

तूं मेरे जीवन की है आस, तुझे रक्खूगा दिल के पास 
तूं मेरी प्रेम ग़ज़ल है, तूं मेरी प्रेम ग़ज़ल है

तुम्हे सोचूं, तुम्हे देखू, तुम्हारे गीत में गाऊं
तुम्ही तो हो जीवन का राग, तुम्ही से है ये मेरे दिन रात 
तूं मेरी प्रेम ग़ज़ल है, तूं मेरी प्रेम ग़ज़ल है

जो आज हुए हम दूर, ये है प्यार का एक दस्तूर
कल फिर से होगे पास, हमारा जनम-जनम का साथ 
तूं मेरी प्रेम ग़ज़ल है, तूं मेरी प्रेम ग़ज़ल है

जो आज नहीं मैं पास, तो होती हो तुम क्यों उदास 
करूँगा सात समंदर पार, मिलूँगा तुमसे मेरे दिलदार 
तूं मेरी प्रेम ग़ज़ल है, तूं मेरी प्रेम ग़ज़ल है 

तूं मेरे जीवन की है आस, तुझे रक्खूगा दिल के पास 
तूं मेरी प्रेम ग़ज़ल है, तूं मेरी प्रेम ग़ज़ल है 

==========================================
यहाँ आप मेरी ये कविता मेरी आवाज़ मैं सुन सकते है | ये मेरा नया प्रयोग है, आशा है अच्छा लगेगा | 

-अभिषेक 

Sunday, August 15, 2010

आज का दौर

=============================
इस हादसों के दौर में हम चकनाचूर हो गए
जब से अपनी माँ के आँचल से दूर हो गए

बहुत मुश्किल न था हमारा मशहूर होना यहाँ
हमने जमीर बेंचा और हम मशहूर हो गए

कोई काम नहीं आता एक दूसरे के यहाँ 
आज हम सब देखो कितने मगरूर हो गए

बेटियों को बाप ने ये कह कर जहर दिया 
माफ़ करना हमको हम तो मजबूर हो गए 
 
दह्शदगर्दी छाई है मेरे हर एक शहर में
सुना है अमन के फ़रिश्ते शहरों से दूर हो गए

इस हादसों के दौर में हम चकनाचूर हो गए
जब से अपनी माँ के आँचल से दूर हो गए
=============================

- अभिषेक  

Saturday, August 14, 2010

मेरी कुछ छोटी-छोटी पंक्तियाँ

1).
===========================================
उजाले तेरी यादों के अपनी आँखों में समाये,
इस सफ़र में दिये तेरी यादों के जलाये
चले आये है तेरे शहर से बहुत दूर अब,
क्या फर्क पड़ता है इधर जाएँ या उधर जाएँ
===========================================
2).
===========================================
कोई कहता है की हम यहाँ मंदिर बनायेंगे,
कोई कहता है की हम यहाँ मस्जिद बनायेंगे
अरे मंदिर और मस्जिद तो पहले ही था मेरा देश,
ये तुले है कि ये इसे जहन्नुम बनायेंगे
===========================================
-अभिषेक

Sunday, July 18, 2010

एक दिन वो था जब हम भी मशहूर थे

===========================================

एक दिन वो था जब हम भी मशहूर थे 
मस्त थे मद की मस्तानी में चूर थे 

खोये रहते थे  रात दिन किसी के ख्यालों में 
किसी की नशीली आँखों के नूर थे
एक दिन वो था जब हम भी मशहूर थे  
 
अब आँख खुली तो जाना प्यार क्या होता है 
वरना पहले तो  आँखों के होते हुए भी सूर थे 
एक दिन वो था जब हम भी मशहूर थे 
 
बहुत दूर था काफिला मेरा मंजिले मुहब्बत से 
प्यार तो छोडो प्यार की एक बूँद से भी दूर थे 
एक दिन वो था जब हम भी मशहूर थे 
 
अब नहीं रही शानो शौकत हमारी तो जाना है 
क्यों हम उनके लिए कभी कोयले में कोहनूर थे 
एक दिन वो था जब हम भी मशहूर थे 
 
नाम लेकर निकालते है  अब अपनी महफ़िल से
वो जिनके लिए हम कभी उनके प्यारे हुज़ूर थे 
एक दिन वोह थे जब हम भी मशहूर थे 
मस्त थे मद की मस्तानी में चूर थे 

===========================================
-अभिषेक